Monday, 17 November 2014

The Young and The Brave

PVC Capt Vikram Batra

मैं सिपाही 

अकेला बैठा हूँ एक बर्फीली छोटी पे पैर पसारे 
खुनी रात का सनाटा, टिमटिमाते अनगिनत तारे 
ठंडी हवा भी बेताब है मुझे मौत की नींद सुलाने के लिए 
याद करता हूँ तुझे ए दोस्त अपना दिल बहलाने के लिए 

जाम छलकते होंगे, यारों की महफ़िल रोज़ जमती होगी 
हँसी  के कहकहे गूंजते होंगे, कहानियाँ  नयी बनती होंगी 
अपने ठन्डे पानी की बोत्तल उठता हूँ जाम से जाम टकराने के लिए 
मेरा दिल भी करता है ए दोस्त, तेरी महफ़िल का हिस्सा बन जाने के लिए 

Mobile Laptop से मॅहगे खिलोनो पे नाचती तेरी तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी 
रात में भी दिन सी चकाचौंध और पैसे की है  बंदगी 
मेरा खिलौना बस यह एक राइफल आग उगलने वाली 
कमर में बांधे बारूद , मैं, सिर्फ  मैं, और यह रात काली 

Mall Multiplex या Cafe , तेरी  हर  शाम की यह कहानी 
डिस्को में थिरकते पाँव और गूंजते संगीत में मदमस्त तेरी जवानी 
मैं खुल के गा  नहीं सकता, एक धुन मेरा दिल भी गुनगुनाये 
क्या करूँ, एक आहट की ताक  में बैठे हैं मेरी मौत के  साये 

तेरी महफ़िल सजती रहे, किसी को तो महफ़िल छोड़ कर जाना होगा 
जाम तेरे बहते रहे, किसी को तो खून बहाना  होगा 
अपनों के बीच चैन से सोना, चाहे अँधेरा  हो  जितना गहरा 
सतर्क हूँ, जाग रहा हूँ ए दोस्त, दे रहा हूँ पेहरा 









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