Friday, 21 November 2014

The Death of A Soul

 


 
आत्मा की मृत्यु

मंदिर के पुरोहित

अंग पे पीताम्बर ओढ़े ,
माथे पर चन्दन केसर का तिलक लगाये
पुरोहित प्रबंधक, लोभ में अंधे
मायावी के चरणों से भक्तों की माया चुराएं

ज्ञान और श्रद्धा के स्तम्भ किसी युग के
आज इनकी नीँव क्षतिग्रस्त हो चुकी है
शरीर जीवित हैं इनके पर आत्मा की मृत्यु हो चुकी है

विधालय  के शिक्षक

जर्जर भवन विधालय के , धूल धूसरित कक्षा में
पाठकों के रिक्त आसन देखो
गोबिंद से पहले गुरु, ऐसे अलंकृत शिक्षक
कैसे करते अध्यापन देखो

विधालय विरान  है, शिक्षक के घर उमड़ा
बच्चों का जन समूह  भारी है
ज्ञान का प्रकाश  बांटना बना व्यवसाय
गुरु भी आज व्यापारी है

काला स्याह ग्रहण से ग्रसित
समाज से सूरज की किरण खो चुकी है
शरीर जीवित हैं इनके, पर आत्मा की मृत्यु हो चुकी है

to be continued:-

Wednesday, 19 November 2014

When My Angel Sleeps

दुनिया ने पढ़ लिए
      गीता वेद पुराण सारे
सत्संग सुनने पहुंचे कई
     साधु महामाओ के द्वारे
विचलित मन  की शांति की खोज में
      खो गए कई हिमालय की गोद में

रात थी, पर मधम  रौशनी भी
      माथे पर बिखरी लट तेरे बालो की
चादर ओढ़े तू सोया हुआ
      शायद सपनों में खोया हुआ

एक टक निहारूं चेहरा तेरा
       युहीं शांत हो जाए मन मेरा

 

In conversation with God


















जीवन की राह पर चलते चलते पहुंचा वहाँ
एक झील थी और अर्ध विराम का चिन्ह लगा था जहां

सोचा थोड़ा विश्राम कर लूँ
और थोड़ा विचार कर लूँ

जीवन की रह पर क्या खोया क्या पाया
झील की तरफ बड़ा, ज्यों झुका देखा एक साया

मुरझाया चेहरा, ढलकी मांसपेशियां
सफ़ेद बाल, आँखों तले झुर्रियां



कौन हो तुम, पूछा मैंने
आवाज़ आई
अपने आप को नहीं पहचानते

क्यों व्यंग करते हो
मैं सुन्दर बलशाली शरीर का स्वामी
तेज झलकता चेहरा मेरा
आँखों में कुछ कर दिखने की चमक
नहीं हो सकता यह प्रतिबिम्ब मेरा

                       निकलो भ्रम से प्राणी,
                       यह है जीवन का अर्ध विराम
                       शक्ति सुंदरता का आज से  नाश होगा
                       और जिस दिन हो जायेगा शरीर ऊर्जा विहीन
                       वह दिन होगा जीवन का पूर्ण विराम
                       यही है विधि का विधान

पर मेरे कार्य पड़े हैं कितने अधूरे
सपने करने हैं कितने साकार
और समय पाना चाहता हूँ मैं
दुबारा जीना चाहता हूँ मैं

                       तुम्हारा शरीर भोग चूका
                       जीवन के रस सारे
                       जो कर्म किये थे
                       लिख दिए भाग्य में तुम्हारे
                       अब इस पाप का बोझ  ले कर
                       आगे बड़ो जीवन की राह पर

माना मुझ से गलतियां हुईं हैं
जहां आसान लगा झूठ अधर्म को अपनाया
कुछ पुण्य आत्माओं को भी है दुखाया
जीवन के लेखे जोखे से
यह सब मिटाना चाहता हूँ मैं
दुबारा जीना चाहता हूँ मैं

                     अवसर दिया तुम्हे और, करो सपने साकार
                     पश्चाताप में पुण है जान ले यह संसार
                    तुम्हारा ही एक अंश ले के बना दी मैंने काया
                    प्राण भी डाल दिए उसमें देखो मेरी माया

इतनी की कृपा, कृतज्ञ हूँ मैं  भगवान
इस शरीर का अब हो भी जाये पूर्ण विराम
संसार में रहेगा फिर भी मेरा नाम
रहेगी शक्ति मेरी, महत्वकांशा मेरी
मेरे सपने
मेरा तेज
मेरा लक्ष्मणय

written on W.O.Noroc 23 March 2006









 

Monday, 17 November 2014

KAUN HO TUM

 
I hold your hands
and look into your eyes
look into your soul
...and I find me looking at myself

 I am looking for my soulmate and I find my own soul.
 
 
कौन हो तुम 
 
बरसात आंधी, कुदरत की मार 
कभी धूप  गरम 
 
धीरे धीरे लड़खड़ाते
उठते बढ़ते मेरे कदम 
 
थकी टूटी  नाउम्मीद 
घुटने टेकती ज़िन्दगी 
 
उखड़ती साँसे सूखे होंठ 
करूँ  तेरी बंदगी 
 
ठन्डे हवा के झोके सी 
तू आई बन के फरिश्ता 
 
सागर की गहरायी तुझमें 
और मैं एक बूँद  को तरसता 
 
मेरे पलकों से पोंछ के आंसू 
माथे से पोंछ के पसीना 
 
हाथ थाम के संभाला मुझे 
फिर से सीखा दिया जीना 
 
कौन हो तुम 
 
मेरे सवाल का ना  कोई जवाब दिया 
जाते जाते बस हलके से मुस्कुरा दिया 
 
आज फिर जख्म हैं गहरे 
और मरहम की भूख मेरी 
 
बेइंतेहा दर्द से परे 
इन् आँखों क तलाश तेरी 
 
जानता हूँ मजबूर हो तुम 
तुम्हे तो आना है 
 
जानना है कौन हो तुम 
दर्द तो एक बहाना है 
 
कौन हो तुम 
 
मेरा सवाल आज ज़ुबान तक नहीं आया 
तेरे माथे पे शिकन, और मैं मुस्कुराया 
 
हाथ थाम के जो आँखों में देखा तेरी 
एक झलक दिखी तेरी रूह 
 
खुदा का कैसा यह करिश्मा 
हूँ अपने आप से ही रूबरू 
 
तलाश खत्म हुई आज
मंज़िल अपनी है पायी 
 
सूकून  बहुत है जान के 
मेरी रूह तुझे में समायी 
 
मोहब्बत दो दिलों के मिलने को 
सारा जहां  कहता है 
 
हमें क्या इन् अफ़सानो  से 
हम नें रूहों को मिलते देखा है 
 
 
 
 
 
 
 

 
 
 
 

The Young and The Brave

PVC Capt Vikram Batra

मैं सिपाही 

अकेला बैठा हूँ एक बर्फीली छोटी पे पैर पसारे 
खुनी रात का सनाटा, टिमटिमाते अनगिनत तारे 
ठंडी हवा भी बेताब है मुझे मौत की नींद सुलाने के लिए 
याद करता हूँ तुझे ए दोस्त अपना दिल बहलाने के लिए 

जाम छलकते होंगे, यारों की महफ़िल रोज़ जमती होगी 
हँसी  के कहकहे गूंजते होंगे, कहानियाँ  नयी बनती होंगी 
अपने ठन्डे पानी की बोत्तल उठता हूँ जाम से जाम टकराने के लिए 
मेरा दिल भी करता है ए दोस्त, तेरी महफ़िल का हिस्सा बन जाने के लिए 

Mobile Laptop से मॅहगे खिलोनो पे नाचती तेरी तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी 
रात में भी दिन सी चकाचौंध और पैसे की है  बंदगी 
मेरा खिलौना बस यह एक राइफल आग उगलने वाली 
कमर में बांधे बारूद , मैं, सिर्फ  मैं, और यह रात काली 

Mall Multiplex या Cafe , तेरी  हर  शाम की यह कहानी 
डिस्को में थिरकते पाँव और गूंजते संगीत में मदमस्त तेरी जवानी 
मैं खुल के गा  नहीं सकता, एक धुन मेरा दिल भी गुनगुनाये 
क्या करूँ, एक आहट की ताक  में बैठे हैं मेरी मौत के  साये 

तेरी महफ़िल सजती रहे, किसी को तो महफ़िल छोड़ कर जाना होगा 
जाम तेरे बहते रहे, किसी को तो खून बहाना  होगा 
अपनों के बीच चैन से सोना, चाहे अँधेरा  हो  जितना गहरा 
सतर्क हूँ, जाग रहा हूँ ए दोस्त, दे रहा हूँ पेहरा 









My Father Ravi




 
 



मैं रवि , सूर्य सूरज भी मैं , मैं ही भास्कर भानु
देखता सुनता सब कुछ मैं , दिल की बात भी मैं जानू


जो जानते समझते मुझे, मान करते, करते नमस्कार
अनजान जो मेरी क्षमता से, वह करते तिरस्कार








              चुटकी भर तेज से , सम्पूर्ण जगत प्रकाशमय कर दूँ
              करू अगर शक्ति प्रदर्शन, तो समाप्त यह समय कर दूँ



                  अहंकार नहीं मुझे, अपनी  मर्यादा में रहना जानू
                  मैं रवि , सूर्य सूरज भी मैं , मैं ही भास्कर भानु 

Sunday, 16 November 2014

THE UNSAID

Birds fly home, Sun sets
As the sky turns amber
I wander aimlessly
Search, what I faintly remember

As tears well up
I look up at the sky
I am still alone
Oh God, tell me why

She was born
but a few years and miles away
I had to wait
till our paths crossed one day

The two shall meet
I bless you, he had said
Will I make her mine ?
He smiled, left it unsaid.

Is it lust or hunger,
Flesh you want to feed ?
Why you call it love
and not carnal desires or greed ?

She will be yours only
This I promise and bless
From now till eternity
But prove your love selfless

I know it is you
Your eyes are still the same
You look at me and smile
Another someone with no name

I watch over you
Content to watch from far
For every moment of separation
My heart carries a scar

Another man takes you
And you carry his name
A union sanctified by society
Where my feelings have no name



I see you, Man and Woman
Jealous, but I cannot be
My shame, I bury deep
Only a smile you shall see

And over the years I learn
Sometimes stumble and fall
Unblemished, pure, selfless
Is this Love, they call

I watch, till I can't watch
and my strength begins to subside
A million questions in your heart
As you stand by my side

Who am I and why
In your tears my heart bled
But I have an eternity to tell you
So, leave it unsaid