
मैं रवि , सूर्य सूरज भी मैं , मैं ही भास्कर भानु
देखता सुनता सब कुछ मैं , दिल की बात भी मैं जानू
जो जानते समझते मुझे, मान करते, करते नमस्कार
अनजान जो मेरी क्षमता से, वह करते तिरस्कार

चुटकी भर तेज से , सम्पूर्ण जगत प्रकाशमय कर दूँ
करू अगर शक्ति प्रदर्शन, तो समाप्त यह समय कर दूँ
अहंकार नहीं मुझे, अपनी मर्यादा में रहना जानू
मैं रवि , सूर्य सूरज भी मैं , मैं ही भास्कर भानु

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